PMEGP लोन कैसे लें: सब्सिडी, पात्रता और आवेदन की पूरी जानकारी
नई फैक्ट्री, वर्कशॉप या सर्विस यूनिट खोलनी है? PMEGP में बैंक लोन के साथ 15 से 35% तक सरकारी सब्सिडी मिलती है। जानिए कौन ले सकता है और आवेदन कैसे करें।
Bihar Directory Team · · 7 मिनट पढ़ें
अगर आप गाँव या शहर में कोई छोटा उद्योग, वर्कशॉप या सर्विस सेंटर खोलना चाहते हैं और पूँजी कम है, तो PMEGP लोन आपके लिए सबसे काम की सरकारी योजनाओं में से एक है। इसमें बैंक से लोन मिलता है और साथ में प्रोजेक्ट लागत का 15% से 35% तक सब्सिडी सरकार देती है। इस लेख में हम सीधी भाषा में बताएँगे कि PMEGP लोन कैसे लें, कौन ले सकता है, अपना कितना पैसा लगाना होगा और आवेदन कहाँ करें।
PMEGP क्या है और बिहार में इसे कौन चलाता है?
PMEGP का पूरा नाम है प्रधानमंत्री रोज़गार सृजन कार्यक्रम। यह केंद्र सरकार की योजना है, जिसकी मुख्य एजेंसी खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) है। बिहार में आपका आवेदन इन तीन में से किसी एक एजेंसी के ज़रिए आगे बढ़ता है:
- KVIC का राज्य कार्यालय, पटना
- बिहार राज्य खादी ग्रामोद्योग बोर्ड
- ज़िला उद्योग केंद्र (DIC), जो हर ज़िले में है, जैसे सासाराम, गया, मुज़फ़्फ़रपुर, दरभंगा
ऑनलाइन फ़ॉर्म भरते समय आप खुद एजेंसी और बैंक शाखा चुनते हैं। मौजूदा नियम 2021-22 से 2025-26 की अवधि के लिए मंज़ूर हुए थे, इसलिए आवेदन से पहले KVIC की आधिकारिक वेबसाइट पर देख लें कि आवेदन खुले हैं और कोई नियम बदला तो नहीं।
पात्रता — कौन आवेदन कर सकता है?
- 18 साल या उससे ज़्यादा उम्र का कोई भी व्यक्ति
- आमदनी की कोई ऊपरी सीमा नहीं है
- सिर्फ़ नया काम शुरू करने के लिए; पहले से चल रही दुकान या यूनिट के विस्तार के लिए नहीं
- एक परिवार (पति-पत्नी) से सिर्फ़ एक व्यक्ति को फ़ायदा
- जिसने पहले किसी और सरकारी योजना में सब्सिडी ली है, वह पात्र नहीं
- मैन्युफैक्चरिंग में ₹10 लाख से ऊपर और सर्विस में ₹5 लाख से ऊपर के प्रोजेक्ट के लिए आठवीं पास ज़रूरी
स्वयं सहायता समूह, सोसाइटी, उत्पादन सहकारी समिति और ट्रस्ट भी आवेदन कर सकते हैं, बशर्ते उन्होंने उसी काम के लिए कोई और सरकारी लाभ न लिया हो।
कितने तक का प्रोजेक्ट और किस काम के लिए?
- मैन्युफैक्चरिंग (कुछ बनाना, जैसे फ़र्नीचर, मसाला, बेकरी, ईंट, अगरबत्ती): अधिकतम ₹50 लाख
- सर्विस या बिज़नेस (जैसे रिपेयर सेंटर, ब्यूटी पार्लर, टेंट हाउस): अधिकतम ₹20 लाख
प्रोजेक्ट लागत में मशीन, शेड या बनावट का खर्च, फ़र्नीचर और शुरुआती कार्यशील पूँजी (कच्चा माल, स्टॉक) जुड़ती है। ज़मीन की कीमत नहीं जुड़ती।
ध्यान रखें: सिर्फ़ ख़रीदकर बेचने वाला काम, जैसे साधारण किराना या कपड़े की दुकान, PMEGP में नहीं आता। ऐसे काम के लिए मुद्रा लोन देखें। मांस से जुड़ा काम, नशे की चीज़ें और खेती-फ़सल उगाना भी इसमें मना है, लेकिन डेयरी, मुर्गीपालन और मछली पालन से जुड़ी यूनिट चल सकती है।
PMEGP में सब्सिडी कितनी मिलती है और अपना कितना लगाना होगा?
यह आपकी श्रेणी और यूनिट की जगह (गाँव या शहर) पर निर्भर है:
- सामान्य वर्ग: अपना हिस्सा 10%; सब्सिडी शहर में 15%, गाँव में 25%
- विशेष वर्ग (SC, ST, OBC, अल्पसंख्यक, महिला, पूर्व सैनिक, दिव्यांग, ट्रांसजेंडर, आकांक्षी ज़िले आदि): अपना हिस्सा 5%; सब्सिडी शहर में 25%, गाँव में 35%
बाक़ी पूरा पैसा बैंक लोन के रूप में देता है। सब्सिडी की रक़म बैंक में तीन साल के लिए जमा रहती है और उतनी रक़म पर ब्याज नहीं लगता। तीन साल बाद अगर यूनिट चल रही है और जाँच में सही पाई गई, तो यह रक़म आपके लोन में घट जाती है।
उदाहरण 1: गया के गाँव में फ़र्नीचर यूनिट
रमेश (OBC) गया ज़िले के एक गाँव में लकड़ी का फ़र्नीचर बनाने की यूनिट लगाना चाहते हैं।
- मशीनें और औज़ार: ₹4,50,000
- शेड और बिजली का काम: ₹1,50,000
- लकड़ी और शुरुआती माल: ₹2,00,000
- कुल प्रोजेक्ट: ₹8,00,000
विशेष वर्ग और गाँव, इसलिए:
- अपना हिस्सा (5%): ₹40,000
- बैंक लोन (95%): ₹7,60,000
- सब्सिडी (35%): ₹2,80,000, जो तीन साल बैंक में जमा रहेगी
यानी असल में रमेश को लगभग ₹4.8 लाख पर ही ब्याज देना होगा। प्रोजेक्ट ₹10 लाख से कम है, इसलिए पढ़ाई की शर्त नहीं लगेगी।
उदाहरण 2: पटना में मोबाइल-लैपटॉप रिपेयर सेंटर
सामान्य वर्ग की प्रिया पटना शहर में ₹5 लाख का रिपेयर सर्विस सेंटर खोलना चाहती हैं। महिला होने के कारण वे विशेष वर्ग में आती हैं: अपना हिस्सा ₹25,000 (5%), सब्सिडी ₹1,25,000 (शहर में 25%)। अगर यही काम कोई सामान्य वर्ग का पुरुष करे, तो अपना हिस्सा ₹50,000 और सब्सिडी ₹75,000 (15%) होगी।
ज़रूरी कागज़ात
- आधार कार्ड (ज़रूरी) और पैन कार्ड
- पासपोर्ट साइज़ फ़ोटो
- पते का प्रमाण और यूनिट की जगह गाँव में है तो उसका प्रमाण
- जाति प्रमाण पत्र या विशेष वर्ग का कोई और प्रमाण
- आठवीं या उससे ऊपर का प्रमाण पत्र (जहाँ ज़रूरी हो)
- प्रोजेक्ट रिपोर्ट, मशीनों के कोटेशन के साथ
- दुकान या शेड का किरायानामा या मालिकाना कागज़
- बैंक खाते की जानकारी
प्रोजेक्ट रिपोर्ट ही आपके आवेदन की जान है। इसे खुद कैसे बनाएँ, यह हमारे लेख लोन के लिए बिज़नेस प्लान कैसे बनाएँ में विस्तार से समझाया गया है।
PMEGP ऑनलाइन आवेदन कैसे करें — स्टेप बाय स्टेप
- KVIC की वेबसाइट पर PMEGP ई-पोर्टल खोलें और व्यक्तिगत आवेदक का फ़ॉर्म चुनें।
- आधार नंबर, नाम, श्रेणी, पढ़ाई और यूनिट का पता भरें। गाँव या शहर ध्यान से चुनें।
- एजेंसी (KVIC, खादी बोर्ड या DIC) और पास की बैंक शाखा चुनें।
- काम का प्रकार, लागत का ब्योरा भरें और प्रोजेक्ट रिपोर्ट व कागज़ अपलोड करें।
- आवेदन जमा करके आवेदन संख्या लिख लें, इससे स्थिति देख सकते हैं।
- ज़िला स्तर पर जाँच होती है, ज़रूरत पड़ने पर छोटा इंटरव्यू भी। फिर फ़ाइल बैंक को जाती है।
- बैंक जगह देखता है, आपका सिबिल स्कोर जाँचता है और लोन मंज़ूर करता है।
- मंज़ूरी के बाद EDP ट्रेनिंग करनी होती है: ₹2 लाख तक के प्रोजेक्ट में ज़रूरी नहीं, ₹5 लाख तक कम से कम 5 दिन, उससे ऊपर कम से कम 10 दिन। यह ऑनलाइन भी हो सकती है।
- बैंक पहली किस्त देता है और सब्सिडी मँगाकर जमा करता है।
- यूनिट चालू होते ही मुफ़्त उद्यम रजिस्ट्रेशन करा लें।
नियमों में समय-सीमा तय है, पर असल में दो से चार महीने लग सकते हैं। बीच-बीच में बैंक शाखा में जाकर विनम्रता से बात करते रहें।
आवेदन रिजेक्ट क्यों होते हैं?
- साधारण ट्रेडिंग वाली दुकान को "बिज़नेस" बताकर आवेदन
- कहीं से कॉपी की हुई प्रोजेक्ट रिपोर्ट, बढ़ा-चढ़ाकर बिक्री
- पुराना लोन बकाया या ख़राब सिबिल स्कोर; सुधारने के तरीके सिबिल स्कोर कैसे सुधारें में पढ़ें
- गाँव-शहर ग़लत चुनना या यूनिट बैंक के इलाक़े से बाहर होना
- कोटेशन, किरायानामा या जाति प्रमाण पत्र न लगाना
- बैंक के बुलाने पर न जाना
रिजेक्ट होने पर कारण लिखित में माँगें। कई बार एजेंसी फ़ाइल दूसरे बैंक को भेज देती है।
गारंटी (कोलैटरल) और दूसरा लोन
योजना के नियमों के अनुसार ₹10 लाख तक के लोन पर बैंक को ज़मीन-मकान की गारंटी नहीं माँगनी चाहिए। बड़े लोन में बैंक CGTMSE गारंटी कवर ले सकता है, जिसके बारे में बिना गारंटी बिज़नेस लोन वाले लेख में बताया गया है।
पहली यूनिट अच्छी चले, लोन चुक जाए और सब्सिडी एडजस्ट हो जाए, तो विस्तार के लिए दूसरा लोन भी मिल सकता है: मैन्युफैक्चरिंग में ₹1 करोड़ तक और सर्विस में ₹25 लाख तक, 15% सब्सिडी के साथ।
बिहार सरकार की अपनी मुख्यमंत्री उद्यमी योजना से भी तुलना कर लें, कुछ लोगों के लिए वह बेहतर हो सकती है। अंग्रेज़ी में विस्तृत गाइड के लिए PMEGP loan and subsidy guide पढ़ें।
आगे क्या करें
अपना काम तय करें, मशीनों के दो-तीन कोटेशन लें, प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाएँ और पोर्टल पर आवेदन करें। पास के बैंक और लोन सलाहकार रोहतास के बैंकिंग और वित्तीय सेवाएँ पेज पर देख सकते हैं। यूनिट चालू होते ही Bihar Directory पर अपना बिज़नेस मुफ़्त लिस्ट करें, ताकि पूरे बिहार के ग्राहक आपको ढूँढ सकें, कॉल और WhatsApp कर सकें।
यह सामान्य जानकारी है, क़ानूनी या वित्तीय सलाह नहीं। आवेदन से पहले ताज़ा नियम KVIC, ज़िला उद्योग केंद्र या अपने बैंक से ज़रूर पक्का करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
PMEGP में सब्सिडी कितनी मिलती है?
सामान्य वर्ग को शहर में 15% और गाँव में 25% सब्सिडी मिलती है। SC, ST, OBC, अल्पसंख्यक, महिला, पूर्व सैनिक, दिव्यांग और ट्रांसजेंडर आवेदकों को शहर में 25% और गाँव में 35% सब्सिडी मिलती है।
PMEGP में ज़्यादा से ज़्यादा कितने का प्रोजेक्ट बन सकता है?
नई यूनिट के लिए मैन्युफैक्चरिंग में अधिकतम ₹50 लाख और सर्विस या बिज़नेस में अधिकतम ₹20 लाख का प्रोजेक्ट। ज़मीन की कीमत प्रोजेक्ट में नहीं जुड़ती।
क्या PMEGP से किराना दुकान खोल सकते हैं?
आम तौर पर नहीं, क्योंकि सिर्फ़ खरीद-बिक्री वाला ट्रेडिंग काम इसमें नहीं आता। किराना जैसी दुकान के लिए मुद्रा लोन बेहतर रास्ता है।
PMEGP के लिए कितनी पढ़ाई ज़रूरी है?
मैन्युफैक्चरिंग में ₹10 लाख से ऊपर और सर्विस में ₹5 लाख से ऊपर के प्रोजेक्ट के लिए कम से कम आठवीं पास होना ज़रूरी है। इससे छोटे प्रोजेक्ट के लिए पढ़ाई की शर्त नहीं है।
सब्सिडी का पैसा कब मिलता है?
सब्सिडी सीधे आपके हाथ में नहीं आती। लोन मंज़ूर होने और ट्रेनिंग के बाद यह बैंक में तीन साल के लिए जमा रहती है, और यूनिट ठीक से चलने पर लोन में एडजस्ट हो जाती है।
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